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साक्षात प्राकट्य स्थल
यह वह अलौकिक और जाग्रत स्थान है जहाँ स्वयं श्री हनुमान जी महाराज धरा चीरकर प्रकट हुए हैं।
परम पूजनीय गुरुजी की अनन्य भक्ति, कठोर साधना और दिव्य संकल्प से इस पावन क्षेत्र को "श्री प्रगट हनुमानजी देवस्थानम्" के रूप में स्थापित किया गया। यह भूमि सदियों पुराने ऐतिहासिक वैश्विक रेशम मार्ग (Silk Route) पर स्थित है, जो इसकी प्राचीन दिव्यता को दर्शाती है।
भक्तों के कल्याण हेतु देवस्थानम् में निरंतर संचालित होने वाली आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवाएँ।
प्रत्येक मंगलवार बाबा के दरबार में निःशुल्क अर्जी एवं मनोकामना पूर्ति।
सामूहिक सुंदरकाण्ड एवं हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन एवं बुकिंग।
प्रतिदिन विशाल भंडारा — प्रसाद रूपी भोजन सेवा, आप भी सहयोगी बनें।
गुरुजी के सानिध्य में व्यसन त्याग एवं जीवन परिवर्तन का संकल्प।
गौशाला में गौमाता की सेवा एवं चारे हेतु सहयोग की सुविधा।
बाबा के श्रृंगार एवं ध्वजा अर्पण की विशेष सेवा बुकिंग।
"हनुमान जी के चरणों में जिसका समर्पण है, उसके जीवन में कभी संकट टिक नहीं सकता।" — मन्नत बाबा जी
श्री प्रगट हनुमान जी देवस्थानम् के संस्थापक और मार्गदर्शक परम पूजनीय गुरुजी को श्रद्धालु अगाध श्रद्धा से 'मन्नत बाबा जी' के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने बजरंगबली की अत्यंत कठिन और निष्काम साधना की है, जिसके फलस्वरूप आज उनकी वाणी और सानिध्य में भक्तों को साक्षात शांति की अनुभूति होती है।
गुरुजी का संकल्प केवल आध्यात्मिक दीक्षा देना नहीं, बल्कि समाज का कल्याण करना है। उनके सानिध्य में यह देवस्थानम् आज मध्य प्रदेश में नशामुक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
बाबा की स्तुति का पावन पाठ — साथ में चालीसा सुनें एवं मन ही मन जाप करें।
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥
आपके सहयोग से बाबा का भव्य धाम आकार ले रहा है। इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें।
मन्दिर के विकास कार्यों, गऊ सेवा एवं निरंतर चलने वाले भंडारे में अपनी श्रद्धानुसार ऑनलाइन सहयोग राशि भेजें।
अपने नाम एवं गोत्र से सुंदरकाण्ड पाठ, भंडारा, श्रृंगार अथवा विशेष पूजा की बुकिंग करें।
फॉर्म भरें — मन्दिर परिवार आपसे संपर्क कर विवरण की पुष्टि करेगा।
मन्नत बाबा का दरबार प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार, सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक लगता है। अर्जी लगाना पूर्णतः निःशुल्क है।
नहीं। दरबार में अर्जी लगाने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। यह पूर्णतः श्रद्धा पर आधारित है।
ऑनलाइन दान करते ही आपके द्वारा दी गई ईमेल आईडी पर पावन रसीद स्वतः भेज दी जाती है। भुगतान पूर्णतः सुरक्षित (Razorpay) है।
आप मंगलवार दरबार में उपस्थित होकर गुरुजी के सानिध्य में नशामुक्ति संकल्प ले सकते हैं। अधिक जानकारी हेतु मन्दिर कार्यालय से संपर्क करें।
मन्दिर सूखी सेवनिया (भोपाल-विदिशा मार्ग) पर स्थित है। संपर्क पृष्ठ पर दिए गए मानचित्र से आप आसानी से रास्ता देख सकते हैं।